Monthly Archives: October 2011

एक मुलाकात –प्रसेनजित सरकार  आज फिर मुलाकात हुई उनसे और उनकी तन्हाई से ऐसा लगा की खुशियों की बारिश कर दू पर रोक लिया अपने आप को  बस चुपचाप देखता ही रहा उनकी वही दो आँखे ऐसा लगा जैसे अभी … Continue reading

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আবার ফিরে আসতে চাই -প্রসেনজিত সরকার  তোমারি কথাযে আমার  জীবন চলে তোমারি পথে আমি চলতে চাই তোমারি সঙ্গে আমি হারিয়ে যেতে চাই তোমার জীবনে নিজের জীবন খুজতে চাই যেমন সকাল হয়ে রাত মুছে তারার আলয়ে সন্ধে নামে উজল হয়ে ওঠে … Continue reading

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